Skip to main content

रामदेवपिर की जीवनकथा

ग्यारहवी शताब्दी में दिल्ली के एक राजा थे श्री अनंगपाल जी  !उनके दो पुत्रिया थी कमला बाई और रूप सुंदरी बाई ! कमला बाई का विवाह अजमेर के राजा सोमेश्वर चोहान के साथ हुआ  तथा रूप सुंदरी बाई का विवाह कनोज के राजा विजयपाल जी राठोर के साथ हुआ ! महाराज अनंगपाल जी को कोई लड़का नहीं था ! उन्होंने कमला बाई के पुत्र पृथ्वीराज चोहान को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया !
                    धीर सिंह जी तंवर महाराज अनंगपाल जी के चचेरे भाई थे ! उन्होंने कुछ राज्य धीर सिंह जी तंवर को भी दिया ! धीर सिंह जी तंवर को एक पुत्र था जिनका नाम रनसिंह जी तंवर था ! रनसिंह जी तंवर को दो पुत्र थे एक का नाम धनरूप जी तंवर तथा दुसरे का नाम अजमल जी तंवर था !धनरूप जी तंवर को दो पुत्रिया थी लच्छा बाई एवं सुगना बाई !अजमल जी तंवर का विवाह जैसलमेर की राजकुमारी मैनादे के साथ हुआ ! अजमल जी तंवर पोकरण के राजा बने ! उनको कोई संतान नहीं थी !
                    राजा अजमल जी द्वारिकाधीश जी के परमभक्त थे ! वे हमेशा राज्य की सुख शांति की मनोकामना से द्वारिका जाते थे ! एक बार उनके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा ! वे राज्य में अच्छी बारिश की मनोकामना लेकर द्वारिका गए ! कहते है भगवन द्वारिकाधीश की कृपा से उनके राज्य में बहुत अच्छी बारिश हुई ! बारिश होने की अगली सुबह किसान अपने अपने खेतों को जा रहे थे , रस्ते में उनको राजा अजमल जी मिल गए ! किसान वापस अपने घरों की तरफ जाने लगे ! राजा ने वापस जाने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया की महाराज आप निसंतान है इसलिए आपके सामने आने  से अपशकुन मानकर वे वापस लौट रहे है ! राजा को यह सुनकर बहुत दुःख हुआ लेकिन अजमल जी ने किसानो को कुछा नहीं कहा ! वे वापस घर आ गए और काफी निराश हुए !
                        उन्होंने संतान प्राप्ति की मनोकामना से द्वारिकाधीश के दर्शन हेतु जाने का निश्चय किया ! वे भगवन द्वारिकाधीश के प्रसाद हेतु लड्डू लेकर गए !मंदिर में पहुचकर राजा अजमल जी ने अत्यंत दुखी होकर भगवन द्वारिकाधीश की मूर्ति के सामने अपना सारा दुख कहा ! अपना दुखड़ा भगवन को सुनाने के बाद राजा अजमल जी ने बड़ी याचक दृष्टि से भगवन की मूर्त को देखा !
भगवन की मूर्ति हसती हुई सी देखकर अजमल को गुस्सा आया और उन्होंने लड्डू फेका , जो मूर्ति के सिर पर जा लगा ! यह सब देखकर मंदिर का पुजारी अजमल जी पागल समझकर बोला की भगवन यहाँ नहीं है भगवन तो समुद्र में सो रहे है !अगर आपको उनसे मिलाना है तो समुद्र में जाओ !
                       राजा अजमल जी बहुत दुखी होने के कारण पागलपन से समुद्र के किनारे गए और समुद्र में कूद गए ! भगवन द्वारिकाधीश ने राजा अजमल को समुद्र में दर्शन दिए और कहा की वे खुद भादवा की दूज की दिन राजा अजमल के घर पुत्र रूप में आयेंगे !राजा अजमल ने देखा की भगवन के सिर पर पट्टी बंधी थी ! राजा अजमल जी ने पूछा भगवन आपको और ये चोट !भगवन ने कहा मेरे एक भोले भक्त ने लड्डू की मारी ! यह सुनकर अजमल जी शर्मिंदा हुए ! राजा अजमल जी भगवन से बोले भगवन मुझ अज्ञानी को कैसे पता होगा की आप ही मेरे घर आये है ! तो भगवन ने कहा जब मैं तेरे घर आउगा तो आँगन में कुमकुम के पैरों के निशान बन जायेंगे , मंदिर का शंख अपने आप बजने  लगेगा ! राजा अजमल जी ख़ुशी ख़ुशी घर लौटे और रानी को सारी बात बताई ! कुछ दिन बाद राजा अजमल के घर एक लड़का हुआ जिनका नाम ब्रिह्मदेव रखा गया ! भगवन के कहे अनुसार ही भादवा की दूज के दिन भगवन द्वारिकाधीश ने राजा अजमल के घर रामदेव के रूप में अवतार लिया !

Popular posts from this blog

અઘોરી સાધુ વિશે કેટલીક અજાણી અને અદભૂત વાતો જે કોઇ ને ખબર નથી.વાંચો આ રહસ્ય

ડરમણા, સાધુઓને સૌથી આદરણીય પ્રજાતિ, ભારતના યોગી અઘોરી સાધુ પોતાની દરરોજની ભયાનક રીતીઓ અને અનુષ્ઠાનો માટે કુખ્યાત છે, આ બધી વસ્તુઓના લીધે લોકોના મનમાં તેમના પ્રત્યે એક જિજ્ઞાસા જાગે છે. આવો જાણીએ કે અઘોરી સાધુ કોણ છે…     અઘોરી સાધુ કોણ છે અઘોરી ભારતના સાધુઓ અને સંન્યાસીઓનો એક વિશેષ કબીલો છે. તેમનું અસ્તિત્વ હજારો વર્ષોથી છે, સૌથી પહેલાં અધોરી સાધુ કીનારામ હતા. તે વારાણસી (બનારસ)માં ગંગા નદીના કિનારે રહેતા હતા જ્યાં પવિત્ર કાશી વિશ્વનાથ મંદિર આવેલું છે. પુનર્જન્મના ચક્રમાંથી છુટકારો મેળવીને મોક્ષની શોધમાં આ સાધુ ભૈરવના રૂપમાં ભગવાન શિવની પૂજા કરે છે. આ સ્વતંત્રા તેમને તે પરમ તત્વની સાથે પોતાની ઓળખની અહેસાસ કરાવે છે. જે મોતનો આપણે ભય લઇને જીવીએ છીએ આ તે જ મોતનો આનંદ લેતાં સન્માન કરે છે, આવા જ અઘોરી સાધુઓ વિશે અમે તમને કેટલાક તથ્યો જણાવી રહ્યાં છીએ. તેમનું માનવું છે કે જે લોકો નફરત કરે છે તે ધ્યાન કરી શકતા નથી. કુતરા અને ગાયોની સાથે પોતાનું ભોજન શેર કરવામાં તેમને કોઇ ધૃણા હોતી નથી, આ જ્યારે પણ ખાવાનું ખાય છે તેમની સાથે રહેનાર જાનવર પણ એક પ્લેટમાં સાથે ખાય છે. તેમનું ...

नाभि से निकलता है जल, यहां निद्रा में भगवान दूर करते हैं भूतों का साया

मध्यप्रदेश एक से बढ़कर एक मंदिर हैं। छिंदवाड़ा के सौसर में एक ऐसा ही स्थान (जामसांवली मंदिर) है जो अनोखे रहस्यों और प्रताप के लिए जाना जाता है। मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था है कि यहां पूजा-अर्चना करने से भूत प्रेत का साया हटता है। मंदिर में हर दिन सैकड़ों ऐसे लोग भी पहुंचते हैं जो किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी से ग्रस्ति रहते हैं। आज हम यहां आपको इस मंदिर की खूबियों के बारे में बता रहे हैं...    गणपति के रूप में निकलती हैं इस पौधे की जड़ें, तंत्र क्रियाओं में उपयोगी           हनुमान जी की मूर्ति यहां निद्रा की अवस्था में हैं। -किवदंति है कि सालों पहले यहां चोरी करने के लिए कुछ लोग पहुं चे थे। सामग्री बचाने के लिए भगवान लेट गए तब से निद्रा की अवस्था में हैं। -70 किमी दूर छिंदवाड़ा से दूरी पर पांढुर्ना ब्लॉक की सीमा में स्थित है जामसांवली मंदिर, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। -15 फीट ऊंची रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा के नाभि से लगातार निकलता जल किसी औषधि और चमत्कार से कम नहीं है। -भगवान की नाभी से निकले जल का प्रसाद जिसने पा लिया...

About Buddhisam!

1. The Buddha — The self awakened one. The original nature of the Heart; 2. The Dhamma — The Teaching. The nature of reality; 3. The Sangha — a. The Awakened Community. b. Any harmonious assembly. c. All Beings. The Four Noble Truths 1. The Noble Truth of Dukkha - stress, unsatisfactoriness, suffering; 2. The Noble Truth of the causal arising of Dukkha, which is grasping, clinging and wanting; 3. The Noble Truth of Nirvana, The ending of Dukkha. Awakening, Enlightenment. "Mind like fire unbound"; 4. The Noble Truth of the Path leading to Nirvana or Awakening. All Buddhist teachings flow from the Four Noble Truths. Particularly emphasised in the Theravada. The Four Bodhisattva Vows 1. I vow to rescue the boundless living beings from suffering; (Link to 1st Truth) 2. I vow to put an end to the infinite afflictions of living beings; (Link to 2nd Truth) 3. I vow to learn the measureless Dharma-doors; (Link to 4th Truth) 4. I vow to realise the unsurpassed path of the ...