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Showing posts from June, 2017

आज भी जीवित हैं हनुमान जी, इन बातों से होता है साबित

आज भी जीवित हैं हनुमान जी, इन बातों से होता है साबित आपने अक्सर देखा होगा कि जब किसी को डर लगता है, तो 'हनुमान चालीसा' के दोहे अपने आप उसकी जुबान पर आ जाते हैं। जब किसी पर शनि की दशा होती है, तो उसे हनुमान जी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। हर मंगलवार को हनुमान मंदिर में एक लम्बी कतार लगी रहती है। हनुमान जी पर लोगों की इतनी आस्था होने का आखिर कारण क्या है? शायद यह कि हनुमान जी आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। और ये तथ्य इस बात को प्रमाणित भी करते हैं। आठ 'चिरंजीवियों' में से एक हैं हनुमान जी किसी एक श्लोक में तो नहीं लेकिन 'महाभारत' और 'रामायण' में, हनुमान जी सहित सात लोगों के 'चिरंजीवी' अर्थात अमर होने का जिक्र किया गया है। जिनमें द्रोणाचार्य के पुत्र 'अश्वत्थामा', प्रहलाद के परपुत्र 'बलि', महाभारत के राजगुरु 'कृपाचार्य', विष्णु भगवान के छठे अवतार 'परशुराम', रावण के भाई 'विभीषण', ऋषि मृकंदु के पुत्र 'मार्कंडेय' और महाभारत के रचियता 'वेद व्यास' शामिल हैं। किसी भी ग्रंथ या पुराण में हनुमान जी क...

About Buddhisam!

1. The Buddha — The self awakened one. The original nature of the Heart; 2. The Dhamma — The Teaching. The nature of reality; 3. The Sangha — a. The Awakened Community. b. Any harmonious assembly. c. All Beings. The Four Noble Truths 1. The Noble Truth of Dukkha - stress, unsatisfactoriness, suffering; 2. The Noble Truth of the causal arising of Dukkha, which is grasping, clinging and wanting; 3. The Noble Truth of Nirvana, The ending of Dukkha. Awakening, Enlightenment. "Mind like fire unbound"; 4. The Noble Truth of the Path leading to Nirvana or Awakening. All Buddhist teachings flow from the Four Noble Truths. Particularly emphasised in the Theravada. The Four Bodhisattva Vows 1. I vow to rescue the boundless living beings from suffering; (Link to 1st Truth) 2. I vow to put an end to the infinite afflictions of living beings; (Link to 2nd Truth) 3. I vow to learn the measureless Dharma-doors; (Link to 4th Truth) 4. I vow to realise the unsurpassed path of the ...

Sermon at Benares The Four Noble Truths Buddha's teaching

One day, whilst sitting under a great, spreading, Bo tree Siddhartha Gautama felt that he was somehow undergoing profound, and extensive, alterations of realisation and awakening. Siddhartha remained for seven days under the great tree. It is from this times that Siddhartha began to be referred to as the Buddha, a name implying his being Awake and Enlightened. These few day's spent under the Bo tree are considered to have been the time of his Enlightenment. Buddha is said to have "attained Nirvana" - to have achieved a state where suffering is eliminated through the abandonment of desires - desires being the cause of suffering. Such attainmentment is held to bring release from an otherwise endless succession of reincarnations or rebirths. The term Nirvana has suggestive associations with a verb indicating cooling, or possibly, extinguishment!!! Considering himself to have made significant Spiritual Progress and that he now had some Buddha teachings that he thought impo...

द्वारका का रहस्य

द्वारका दक्षिण-पश्चिम गुजरात राज्य, पश्चिम-मध्य भारत का प्रसिद्ध नगर है। यह काठियावाड़ प्रायद्वीप के छोटे पश्चिमी विस्तार, ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित है। द्वारका कई द्वारों का शहर (संस्कृत में द्वारका या द्वारवती) को जगत या जिगत के रूप में भी जाना जाता है। द्वारका भगवान कृष्ण की पौराणिक राजधानी थी, जिन्होंने मथुरा से पलायन के बाद इसकी स्थापना की थी। इसकी पवित्रता के कारण यह सात प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में से एक और चार धामों में से एक है। यह श्रीकृष्ण की कर्मभूमि है। द्वारका का इतिहास – Dwarka History In Hindi मान्यता है कि द्वारका को श्रीकृष्ण ने बसाया था और मथुरा से यदुवंशियों को लाकर इस संपन्न नगर को उनकी राजधानी बनाया था। यहीं बैठकर उन्होने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। पांड़वों को सहारा दिया। धर्म की जीत कराई और, शिशुपाल और दुर्योधन जैसे अधर्मी राजाओं को मिटाया। द्वारका उस जमाने में राजधानी बन गई थीं। बड़े-बड़े राजा यहां आते थे और बहुत-से मामले में भगवान कृष्ण की सलाह लेते थे। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। कहा जा...

नाभि से निकलता है जल, यहां निद्रा में भगवान दूर करते हैं भूतों का साया

मध्यप्रदेश एक से बढ़कर एक मंदिर हैं। छिंदवाड़ा के सौसर में एक ऐसा ही स्थान (जामसांवली मंदिर) है जो अनोखे रहस्यों और प्रताप के लिए जाना जाता है। मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था है कि यहां पूजा-अर्चना करने से भूत प्रेत का साया हटता है। मंदिर में हर दिन सैकड़ों ऐसे लोग भी पहुंचते हैं जो किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी से ग्रस्ति रहते हैं। आज हम यहां आपको इस मंदिर की खूबियों के बारे में बता रहे हैं...    गणपति के रूप में निकलती हैं इस पौधे की जड़ें, तंत्र क्रियाओं में उपयोगी           हनुमान जी की मूर्ति यहां निद्रा की अवस्था में हैं। -किवदंति है कि सालों पहले यहां चोरी करने के लिए कुछ लोग पहुं चे थे। सामग्री बचाने के लिए भगवान लेट गए तब से निद्रा की अवस्था में हैं। -70 किमी दूर छिंदवाड़ा से दूरी पर पांढुर्ना ब्लॉक की सीमा में स्थित है जामसांवली मंदिर, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। -15 फीट ऊंची रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा के नाभि से लगातार निकलता जल किसी औषधि और चमत्कार से कम नहीं है। -भगवान की नाभी से निकले जल का प्रसाद जिसने पा लिया...

रामदेवपिर की जीवनकथा

ग्यारहवी शताब्दी में दिल्ली के एक राजा थे श्री अनंगपाल जी  !उनके दो पुत्रिया थी कमला बाई और रूप सुंदरी बाई ! कमला बाई का विवाह अजमेर के राजा सोमेश्वर चोहान के साथ हुआ  तथा रूप सुंदरी बाई का विवाह कनोज के राजा विजयपाल जी राठोर के साथ हुआ ! महाराज अनंगपाल जी को कोई लड़का नहीं था ! उन्होंने कमला बाई के पुत्र पृथ्वीराज चोहान को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया !                     धीर सिंह जी तंवर महाराज अनंगपाल जी के चचेरे भाई थे ! उन्होंने कुछ राज्य धीर सिंह जी तंवर को भी दिया ! धीर सिंह जी तंवर को एक पुत्र था जिनका नाम रनसिंह जी तंवर था ! रनसिंह जी तंवर को दो पुत्र थे एक का नाम धनरूप जी तंवर तथा दुसरे का नाम अजमल जी तंवर ...

सालंगपुर हनुमानजी जहा कष्टभंजनदेव करते है हर प्रकारके कष्ट का निवारण

गुजरात के भावनगर के सारंगपुर में विराजने वाले कष्‍टभंजन हनुमान यहां महाराजाधिराज के नाम से राज करते हैं. वे सोने के सिंहासन पर विराजकर अपने भक्‍तों की हर मुराद पूरी करते हैं. कहते हैं कि बजरंग बली के इस दर पर आकर भक्‍तों का हर दुख, उनकी हर तकलीफ का इलाज हो जाता है. फिर चाहे बात बुरी नजर की हो या शनि के प्रकोप से मुक्ति की. हनुमान ने अपने बाल रूप में ही सूर्यदेव को निगल लिया था. उन्‍होंने राक्षसों का वध किया और लक्ष्मण के प्राणदाता भी बने. बजरंग बली ने समय-समय पर देवताओं को अनेक संकटों से निकाला. पवनपुत्र आज भी अपने इस धाम में भक्‍तों के कष्‍ट हर लेते हैं, इसलिए उन्‍हें कष्‍टभंजन हनुमान कहते हैं. हनुमान के इस इस दर पर आते ही हर कष्ट दूर हो जाता है. यहां आकर हर मनोकामना पूरी होती है. विशाल और भव्‍य किले की तरह बने एक भवन के बीचों-बीच कष्‍टभंजन का अतिसुंदर और चमत्‍कारी मंदिर है. केसरीनंदन के भव्‍य मंदिरों में से एक कष्‍टभंजन हनुमान मंदिर भी है. गुजरात में अहमदाबाद से भावनगर की ओर जाते हुए करीब 175 किलोमीटर की दूरी पर कष्‍टभंजन हनुमान का यह दिव्‍य धाम है. किसी राज दरबार की तरह सजे...